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ओलावृष्टि से खराब हुई फसल दिखाते रो पड़े किसान

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बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से सिर्फ गेहूं ही नहीं बल्कि लहसुन, चने और धनिए की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। कई खेतों में काट कर रखी गई गेहूं की फसल भी खराब हो गई। इसी तरह बरसात और ओलावृष्टि की चपेट में आने से लहसुन की फसल भी खराब हो गई।

ओलावृष्टि से खराब हुई फसल दिखाते रो पड़े किसान
खराब हुई फसलों के हालात जानने के लिए शनिवार को भाजपा नेता हीरालाल नागर एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता ने सांगोद विधानसभा क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर जायजा लिया।

Kisan Post। ओलावृष्टि के कारण फसल खराब होने पर किसानों पर दु:ख का पहाड़ टूट पड़ा है। किसानों कि खराब हुई फसलों के हालात जानने के लिए शनिवार को भाजपा नेता हीरालाल नागर एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता ने सांगोद विधानसभा क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर जायजा लिया। इस दौरान कई किसान उन्हें पीड़ा बताते हुए रो पड़े। नागर ने कहा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सरकार से बात कर रहे हैं, किसान चिंता ना करें। संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी में शुक्रवार को मौसम में अचानक आए बदलाव के बाद बरसात और ओलावृष्टि हुई। इससे खेतों में तैयार फसल को बड़ा नुकसान हुआ है। इसका पता चलने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने चिंता व्यक्तकी थी। उनके निर्देश पर लोकसभा कार्यालय ने दोनों जिलों के कलक्टर को नुकसान का जल्द से जल्द आकलन करने को कहा था। बिरला ने अपने ओएसडी राजीव दत्ता को भी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पीडि़त किसानों से मिलने को कहा था। इस पर ओएसडी दत्ता ने शनिवार सुबह सांगोद विधानसभा क्षेत्र के कनवास उपखंड में एक दर्जन से अधिक गांवों का दौरा किया। हीरालाल नागर और दत्ता ग्राम उरना, खुजरना, मोहनपुरा, मंगलपुरा, जंगडिय़ाखेड़ी, मांडलियाहेड़ी, कोटबावड़ी, खोदयाहेड़ी, आंवा, पीसाहेड़ा, राजपुरा, बालूहेड़ा, खोड़ा गांवों में पहुंचे और किसानों से उनकी पीड़ा सुनी। किसानों का कहना था फसल बीमा के तहत मुआवजे के लिए 72 घंटे के भीतर हैल्पलाइन नंबर पर कॉल कर आवेदन दर्ज करवाना होता है। अधिकांश किसानों को इस बात की जानकारी नहीं है कि उनकी फसल का बीमा किस कम्पनी के पास करवाया गया है। बैंकों में भी शनिवार व रविवार का अवकाश होने के कारण उनके लिए इसका पता लगाना संभव नहीं है। लिहाजा ऑफ लाइन आवेदन की व्यवस्था की जाए।

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इस पर ओएसडी दत्ता ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव अशोक भूटानी से फोन पर बात कर किसानों की समस्या बताई। इस पर कृषि मंत्रालय की ओर से बीमा कंपनियों को ऑफ लाइन आवेदन भी स्वीकारने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। उच्च अधिकारियों से वार्ता के बाद कनवास उपखण्ड के उप जिला कलक्टर राजेश डागा से चर्चा के बाद तय हुआ कि ओलावृष्टि प्रभावित गांवों में सरपंच के साथ कृषि पर्यवेक्षक प्रभावित किसानों से ऑफलाइन आवेदन प्राप्त कर उन्हें मुआवजा दिलवाने की आवश्यक कार्यवाही करेंगे।

लहुसन को भी नुकसान पहुंचा
बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से सिर्फ गेहूं ही नहीं बल्कि लहसुन, चने और धनिए की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। कई खेतों में किसानों की ओर से काट कर रखी गई गेहूं की फसल भी खराब हो गई। इसी तरह बरसात और ओलावृष्टि की चपेट में आने से लहसुन की फसल भी खराब हो गई। कई खेत ऐसे दिखे जिसमें फसल आड़ी पड़ी दिखी।

उम्मीदें टूट गई
अपनी पीड़ा बताते हुए कुछ किसान भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि कई महीनों की कड़ी मेहनत से फसल तैयार की थी। इस बार फसल की स्थिति भी अच्छी थी। अब जब फसल पककर तैयार थी और इस फसल के आसरे वे कई सपने संजोए बैठे थे तो अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। नागर ने किसानों को ढांढ़स बताते हुए मुआवजे के लिऐ आवेदन करने के लिए कहा।


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Written by kisan post

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